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सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, रात से ही लगी भक्तों की लंबी कतारें

सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार पर उत्तर प्रदेश के शिव मंदिरों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देर रात से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों के बाहर कतारबद्ध नजर आए।

सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, रात से ही लगी भक्तों की लंबी कतारें
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प्रयागराज। सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार पर उत्तर प्रदेश के शिव मंदिरों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देर रात से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों के बाहर कतारबद्ध नजर आए।

प्रयागराज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में सुबह होने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लग गई थीं। मंदिर परिसर शिवभक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ था। भक्त गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फूल लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे। मंदिर में भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

मनकामेश्वर मंदिर के महंत ब्रह्मचारी श्री धरानंद जी महाराज ने बताया कि यह बेहद प्राचीन मंदिर है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहां भगवान शिव की पूजा की थी। उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से यहां पूजा करता है, भगवान शिव उसकी मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं।

मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं में भी गजब का उत्साह देखने को मिला। एक महिला भक्त ने बताया कि सावन के पहले सोमवार का विशेष महत्व होता है, इसलिए वह सुबह से ही मंदिर पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि इतनी भीड़ होने के बावजूद लोगों में भगवान शिव के दर्शन की उत्सुकता कम नहीं हुई।

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि वह सुबह करीब चार बजे मंदिर पहुंचे थे और दर्शन के लिए काफी देर तक लाइन में खड़े रहे। उनका कहना था कि इंतजार लंबा जरूर था, लेकिन भगवान शिव के दर्शन के बाद सारी थकान दूर हो गई और मन को असीम शांति मिली।

भक्तों ने बताया कि सावन का पहला सोमवार उनके लिए किसी पर्व से कम नहीं है। एक श्रद्धालु ने कहा कि रातभर बारिश होती रही, लेकिन उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं आई। भगवान शिव के दर्शन की इच्छा इतनी प्रबल थी कि पूरी रात नींद भी नहीं आई।

उधर, एटा के करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक कैलाश मंदिर में भी सुबह तीन बजे मंदिर के कपाट खोल दिए गए। सुबह चार बजे मंगला आरती के बाद जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ, जो लगातार जारी रहा। मंदिर के मुख्य पुजारी धीरेंद्र झा ने बताया कि सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन करने आते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भक्त पूरे सावन भर यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।

कासगंज के लहरा गंगा घाट से कांवड़िए 51 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर पैदल एटा के कैलाश मंदिर पहुंचे। कांवड़ियों ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं बेहतर थीं। पूरे मार्ग पर पुलिसकर्मी तैनात थे, जिससे यात्रा सुगम रही और किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

कांवड़िए गौरव, अरुण कुमार और नीरज ने बताया कि वे अपने साथियों के साथ पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे हैं। उनका कहना था कि सावन के पहले सोमवार पर जल चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है और इसी आस्था के साथ वे हर साल यह यात्रा करते हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसरों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार व्यवस्था संभालती रहीं, ताकि दर्शन और जलाभिषेक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। सावन के पहले सोमवार पर पूरे प्रदेश में शिवभक्ति, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।



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