एबीवीपी राष्ट्र निर्माण की पाठशाला: गजेन्द्र सिंह शेखावत
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को राष्ट्र निर्माण की पाठशाला बताते हुए कहा है कि यह केवल विद्यार्थियों के बीच काम करने वाला संगठन नहीं है

‘संस्कार निर्माण की प्रयोगशाला’ बताया विद्यार्थी परिषद को
- युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जगाता संगठन – शेखावत
- यशवंत राव केलकर जन्म शताब्दी समारोह में बोले केंद्रीय मंत्री
- तीन पीढ़ियों की यात्रा से ‘विकसित भारत’ की ओर एबीवीपी
जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को राष्ट्र निर्माण की पाठशाला बताते हुए कहा है कि यह केवल विद्यार्थियों के बीच काम करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह युवाओं के मन में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जगाने वाला एक संस्थान है।
श्री शेखावत रविवार रात एबीवीपी द्वारा यशवंत राव केलकर जन्म शताब्दी वर्ष समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने इसे 'संस्कार निर्माण की प्रयोगशाला' बताते हुए कहा कि यह संगठन उस आयु में विचार के बीज बोता है, जब युवा के व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा होता है। उन्होंने कहा कि का कार्यकर्ता कभी 'पुराना' या 'पूर्व' नहीं होता, परिषद का संस्कार और स्वाभाविक प्रवृत्ति कार्यकर्ता के भीतर सदैव जीवित रहती है, चाहे वह जीवन के किसी भी मुकाम पर पहुंच जाए।
उन्होंने विद्यार्थी परिषद की यात्रा को तीन प्रमुख कालखंडों में विभाजित किया। उन्होंने कहा कि वह पीढ़ी जिसने घोर प्रतिकूल परिस्थितियों और संघर्ष के बीच संगठन की नींव रखी। वह पीढ़ी जिसने संगठन को विस्तार दिया और वैचारिक धरातल को मजबूत किया। वर्तमान पीढ़ी, जो अब देश 'संपूर्ण परिवर्तन' के दौर से गुजर रहा है। अब समय उस भव्य भवन को सुसज्जित करने का है, जिसका लक्ष्य 'विकसित भारत' है।
उन्होंने वर्तमान कार्यकर्ताओं को एक महत्वपूर्ण सीख देते हुए कहा कि आज राजनीतिक और शासकीय स्थितियां अनुकूल हैं, लेकिन असली चुनौती इस सुविधा के बीच भी अपने भीतर के अदम्य साहस और संघर्ष की चेतना को सजीव रखने की है। प्रतिकूल परिस्थितियां प्रतिभा को उभारती हैं, लेकिन अनुकूलता में भी लक्ष्य के प्रति वही जीजीविषा और आग बनी रहनी चाहिए।
श्री शेखावत ने श्री यशवंत राव केलकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका दर्शन 'कालनिरपेक्ष' है। उनका विचार कल भी प्रासंगिक था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे पुरानी पीढ़ी के बलिदानों और संकल्पों को अपनी प्रेरणा का स्रोत बनाएं।


