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भारत सीमा के पास पाकिस्तान ने तैनात कीं चीन की एसएच-15 तोपें, 50 किमी से ज्यादा मारक क्षमता वाले सिस्टम से बढ़ी निगरानी

पाकिस्तान ने भारत सीमा के पास चीन की एसएच-15 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गनों की तैनाती बढ़ाई है। वहीं भारत भी एटीएजीएस, के-9 वज्र और एम777 जैसी आधुनिक तोपों के जरिए अपनी आर्टिलरी क्षमता मजबूत कर रहा है।

भारत सीमा के पास पाकिस्तान ने तैनात कीं चीन की एसएच-15 तोपें, 50 किमी से ज्यादा मारक क्षमता वाले सिस्टम से बढ़ी निगरानी
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नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य गतिविधियों के बीच पाकिस्तान ने चीन से प्राप्त एसएच-15 व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गनों की बड़ी संख्या में तैनाती की है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन आधुनिक 155 मिमी और 52-कैलिबर तोपों को मुख्य रूप से भारत से सटी संवेदनशील सीमाओं के पास तैनात किया गया है। इस तैनाती को पाकिस्तान की तोपखाना क्षमता के आधुनिकीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं भारत भी अपनी आर्टिलरी को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

सीमा से सटे इलाकों में SH-15 की तैनाती

रक्षा सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने चीन की सरकारी कंपनी Norinco द्वारा निर्मित SH-15 (चीन में PCL-181) तोपों को पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के कई इलाकों में तैनात किया है। इनकी तैनाती मुख्य रूप से गुजरांवाला, सियालकोट और जलालपुर जट्टन जैसे क्षेत्रों में बताई गई है, जो भारत की सीमा के नजदीक स्थित हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने वर्ष 2019 में ऐसी 236 तोपों का ऑर्डर दिया था। इनकी आपूर्ति 2022 में शुरू हुई, जबकि दूसरी खेप 2023 में मिली। पाकिस्तान को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) समझौते के तहत टैक्सिला स्थित हेवी इंडस्ट्रीज प्लांट में इन तोपों के निर्माण का लाइसेंस भी मिला है।

क्या है SH-15 की खासियत?

SH-15 पाकिस्तान की पहली 52-कैलिबर 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन है। विशेषज्ञों के अनुसार, 52-कैलिबर बैरल लंबी दूरी तक अधिक सटीक निशाना लगाने में सक्षम होता है।

यह तोप सामान्य और रॉकेट-सहायता प्राप्त (Rocket-Assisted) गोले दाग सकती है, जिनकी मारक क्षमता 50 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। यह 6×6 पहियों वाले ट्रक प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे इसे मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाकिस्तान अब भी अमेरिकी मूल की M-109 ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड गनों का उपयोग करता है, क्योंकि वे ऐसे इलाकों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।

भारत भी तेजी से कर रहा है आर्टिलरी का आधुनिकीकरण

भारत भी फील्ड आर्टिलरी रेशनलाइजेशन प्लान के तहत अपनी तोपखाना क्षमता को मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना धीरे-धीरे 105 मिमी तोपों की जगह 155 मिमी आधुनिक तोपों को शामिल कर रही है।

वर्तमान में सेना के पास M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, K-9 वज्र, धनुष और स्वदेशी एटीएजीएस (एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम) जैसी आधुनिक तोपें शामिल हैं। सेना ने 307 ATAGS तोपों का ऑर्डर भी दिया है।

इसके अलावा भारत स्वदेशी माउंट गन सिस्टम (MGS) विकसित कर रहा है, जो SH-15 की तरह पहियों वाले प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा। यह परियोजना विकास के अंतिम चरण में है और इसके शुरुआती फायरिंग परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी नजर

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी-अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बना रहे हैं। हालांकि, सीमा पर हथियारों की तैनाती से क्षेत्रीय सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता बनी हुई है। दोनों देशों की सेनाएं अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार संसाधनों का आधुनिकीकरण कर रही हैं।


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