राज्यसभा में बदल रहा सियासी गणित, एनडीए दो-तिहाई बहुमत के करीब; टीएमसी में टूट का असर संसद तक
तृणमूल कांग्रेस में बगावत और हालिया राज्यसभा चुनावों के बाद संसद का सियासी गणित बदलता नजर आ रहा है। NDA राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकता है, जबकि लोकसभा में भी TMC के बागी सांसदों का असर देखने को मिल रहा है।

राज्यसभा में बढ़ सकती है NDA की ताकत
सूत्रों के अनुसार फिलहाल राज्यसभा में एनडीए के पास 148 सांसदों का समर्थन है। 18 जून को झारखंड और मिजोरम की तीन सीटों पर होने वाले चुनावों के बाद गठबंधन की संख्या में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के कुछ राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफे की स्थिति में होने वाले उपचुनाव भी एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इन परिस्थितियों में एनडीए की संख्या 154 तक पहुंच सकती है। यदि टीएमसी में और टूट होती है और अतिरिक्त सीटें खाली होती हैं, तो यह आंकड़ा 163 तक भी पहुंच सकता है, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब माना जा रहा है।
संवैधानिक संशोधनों के लिए अहम है यह संख्या
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि कई महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में एनडीए की बढ़ती संख्या सरकार की विधायी रणनीति को मजबूती दे सकती है।
वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर होती दिखाई दे रही है। द्रमुक (DMK) और आम आदमी पार्टी (AAP) के अलग रुख अपनाने के बाद गठबंधन की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
TMC के 20 सांसदों के अलग होने से बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता चुनने का ऐलान कर दिया। इन सांसदों ने खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।
बागी सांसदों का दावा है कि उनकी संख्या पार्टी के कुल लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
अदालत में तय होगा 'असली तृणमूल' का सवाल
बागी खेमे के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि उनका समूह एक अलग राजनीतिक दल में विलय कर चुका है और अब यह मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। उनके मुताबिक, असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका अंतिम फैसला अदालत में होगा।
लोकसभा में अभी दूर है दो-तिहाई बहुमत
हालांकि टीएमसी में टूट का असर लोकसभा में भी दिखाई दे रहा है और एनडीए की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी दूर माना जा रहा है। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 363 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में राज्यसभा और लोकसभा दोनों में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं। राज्यसभा चुनाव, उपचुनाव और क्षेत्रीय दलों की रणनीति संसद के शक्ति संतुलन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल नजरें टीएमसी के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल और उसके राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव पर टिकी हुई हैं।


