E20 पेट्रोल पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, जयराम रमेश बोले- वाहन मालिक और मैकेनिक परेशान; सरकार ने सुरक्षा का किया दावा
E20 पेट्रोल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने वाहन मालिकों और मैकेनिकों की शिकायतों का हवाला दिया, जबकि सरकार E20 ईंधन को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बता रही है।

नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की E20 ईंधन नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पर्याप्त और पारदर्शी आंकड़ों के बिना इस ईंधन को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि E20 ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप वाहनों के लिए सुरक्षित है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तकनीकी बहस दोनों जारी हैं।
जयराम रमेश ने सरकार पर लगाए कई आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि संसद में 29 जुलाई को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए जवाब से कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उनका दावा है कि विभिन्न वाहन मालिकों और मैकेनिकों से E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जून 2026 में हुए एक स्वतंत्र सर्वे में 2023 से पहले निर्मित वाहनों के मालिकों ने E20 ईंधन के इस्तेमाल के बाद तकनीकी समस्याओं की शिकायत की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नीति आयोग की 2021 की एक रिपोर्ट में E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ वाहनों के रबर पुर्जों पर उच्च इथेनॉल मिश्रण के संभावित प्रभाव का जिक्र किया गया था।
क्या हैं कांग्रेस के प्रमुख दावे?
कांग्रेस के अनुसार, E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों की ओर से कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। इनमें मुख्य रूप से माइलेज में कमी, इंजन के प्रदर्शन पर असर, ठंड के मौसम में स्टार्टिंग की समस्या तथा पुराने वाहनों में कुछ ईंधन संबंधी पुर्जों के जल्दी खराब होने की बातें शामिल हैं।
जयराम रमेश ने दावा किया कि कुछ तकनीकी रिपोर्टों में ईंधन प्रणाली के धातु और रबर के हिस्सों पर प्रभाव की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इन दावों पर सरकार और संबंधित तकनीकी एजेंसियों की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए गए हैं।
सरकार का क्या है पक्ष?
केंद्र सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसे उन वाहनों के लिए तैयार किया गया है जो इसके अनुरूप डिजाइन किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण में कमी लाना है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि E20 के प्रभाव वाहन के मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्माता द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए पुराने और नए वाहनों की क्षमता में अंतर को ध्यान में रखना आवश्यक है।
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। वाहन मालिकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि उनका वाहन E20 ईंधन के उपयोग के लिए उपयुक्त है।


