ललित सुरजन की कलम से देवयानी के बहाने भारत का अपमान
'भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागड़े की अमेरिका में गिरफ्तारी एक ऐसा स्तब्ध कर देने वाला प्रसंग है, जिसके जख्म भारत की राष्ट्रीय स्मृति को लंबे समय तक सालते रहेंगे।

'भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागड़े की अमेरिका में गिरफ्तारी एक ऐसा स्तब्ध कर देने वाला प्रसंग है, जिसके जख्म भारत की राष्ट्रीय स्मृति को लंबे समय तक सालते रहेंगे। अमेरिका ने ऐसा क्यों किया? इस बारे में पक्ष-विपक्ष दोनों ने बहुत से तर्क दिए हैं, लेकिन हमें इसके मूल में एक ही बात समझ आती है कि अमेरिका चूंकि एक महाशक्ति व उसके साथ उद्धत राष्ट्र है इसलिए वह अपने लिए कोई भी मर्यादा, कोई लक्ष्मण रेखा स्वीकार नहीं करता। अमेरिका ने जो कह दिया वह मानो पत्थर की लकीर है जिसे वर्तमान राजनीति की भाषा में कहा जाता है- ''नॉन निगोशिएबल''। जो अमेरिका अपने बरसों के सामरिक भागीदार पाकिस्तान पर ड्रोन हमले करने में नहीं हिचकिचाता उससे भारत को क्या उम्मीद रखना चाहिए जिसके संबंध अमेरिका के साथ कभी भी बहुत मधुर नहीं रहे और न दोनों के बीच कभी परस्पर विश्वास की भावना रही। यूं तो अपने अभ्युदय से लेकर अब तक अमेरिका के खाते में बहुत सी खूबियां दर्ज हैं जिनकी तारीफ अलेक्स द ताकविले से लेकर बट्रेंड रसल और जवाहरलाल नेहरू तक ने की है, लेकिन जब अमेरिका विश्व राजनीति के रंगमंच पर आता है तो अपनी इन खूबियों को घर में छोड़ आता है जिसके उदाहरण अनगिनत हैं।'
(देशबन्धु में 26 दिसंबर 2013 को प्रकाशित)
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